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आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष की स्मृति में “रीविजिटिंग डेमोक्रेसी डिप्लोमेसी एंड डेवेलपमेंट ऑफ इंडिया@75” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन

आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष की स्मृति में “रीविजिटिंग डेमोक्रेसी डिप्लोमेसी एंड डेवेलपमेंट ऑफ इंडिया@75” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन

“रीविजिटिंग डेमोक्रेसी डिप्लोमेसी एंड डेवेलपमेंट ऑफ इंडिया@75” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन
 
आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष की स्मृति  में  राजनीति विज्ञान विभाग, सी.एम.पी. डिग्री कॉलेज, प्रयागराज और सेंटर फॉर दी स्टडी ऑफ सोसाइटी एण्ड पॉलिटिक्स (सी.एस.एस.पी. ), कानपुर के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 5 अगस्त 2022 “रीविजिटिंग डेमोक्रेसी डिप्लोमेसी एंड डेवेलपमेंट ऑफ इंडिया@75” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस संगोष्टी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रोफेसर पंकज कुमार, डीन,कॉलेज डेवलपमेंट और अध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, और विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर अनिल कुमार वर्मा, निदेशक सी.एस.एस.पी., कानपुर थे। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव, राजनीति विज्ञान विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और विशिष्ट व्यक्त प्रोफेसर रिपु सूदन सिंह, अध्यक्ष, लोक प्रशासन विभाग, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ थे। सत्र की अध्यक्षता और अतिथियों का स्वागत कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर अजय प्रकाश खरे ने किया। उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ गोविंद गौरव ने संगोष्ठी की संकल्पना प्रस्तुत की और संगोष्ठी के विषय और उसकी रूपरेखा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों के द्वारा संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया गया जिसमें 97 चयनित सारांशिकाओं को प्रकाशित किया गया।
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उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रोफेसर पंकज कुमार ने लोकतंत्र के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता और भारत में लोकतंत्र के समृद्ध इतिहास का विश्लेषण प्रस्तुत किया। इसी चर्चा को आगे बढ़ाते प्रोफेसर अनिल कुमार वर्मा ने लोकतंत्र और चुनावी राजनीति के निहितार्थ को स्पष्ट किया और सेंटर फॉर थे स्टडी ऑफ डेवेलपिंग सोसाइटी के फ़ेलो के रूप में किए गए अपने कार्यो और अनुभव को भी साझा किया। मुख्य व्यक्त प्रोफेसर संजय कुमार ने “मैपिंग इंडियन डिप्लोमेसी@75” विषय पर संगोष्ठी को संबोधित किया और बताया कि भारतीय कूटनीति की शुरुवात भारत के विदेश मंत्री ने नहीं बल्कि गृह मंत्री सरदार पटेल रियासतों के एकीकरण की सशक्त नीति और कार्यवाही से की थी। विशिस्ट व्यक्त प्रोफेसर रिपुसूदन सिंह ने 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य, भारत में विकास और लोकतंत्र की चुनौतियां विषय पर प्रकाश डाला। इस सत्र में डॉ अनिल कुमार वर्मा की पुस्तक ए ग्रामर ऑफ पॉलिटिक्स और कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग की पुस्तक कोरोना:एक महामारी के अतिरिक्त डॉ गोविन्द गौरव और डॉ अरुण कुमार वर्मा के सम्पादन में आने वाली पुस्तक “इंडिया@75: डेमोक्रेसी,डिप्लोमेसी एण्ड डेवलपमेंट” के आवरण पृष्ठ का भी विमोचन हुआ।
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इसके पश्चात तीन तकनीकी सत्रों में कुल 70 शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया। इन सत्रों की अध्यक्षता डॉ नीलिमा सिंह, डॉ शिव हर्ष सिंह और डॉ संघ सेन सिंह ने की। डॉ हिमांशु यादव, डॉ अतुल कुमार वर्मा और डॉ अखिलेश पाल क्रमश: इन तकनीकी सत्रों के सह-अध्यक्ष रहे। सत्र के अंत में तीन सर्वश्रेष पत्रों को प्रस्तुत करने वाले शोधार्थियों को पुरस्कृत भी किया गया।
 
संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि जी बी पंत सोशल साइंस इंस्टिट्यूट के निदेशक प्रोफेसर बद्री नारायण और विशिष्ट अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर आर के मिश्र थे। इस सत्र की मुख्य वक्ता प्रोफेसर अनुराधा अग्रवाल, निदेशक, महिला अध्ययन केंद्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने भर में राजनीतिक विकास और लोकतांन्त्रिक विमर्श को उठाया। वहीं विशिस्ट व्यक्ता जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के डॉ अभिषेक श्रीवास्तव ने भारत की अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और वैश्विक स्तर पर उसकी नेतृत्व कुशलता, विशेषकर कोविड काल का वृहद विश्लेषण प्रस्तुत किया।
सत्र के अंत में संयोजक डॉ गोविन्द गौरव ने संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत के दस राज्यों और 24 विश्वविद्यालयों से लगभग 200 शिक्षकों और शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रेषित किए जिनमें से समीक्षा के पश्चात 97 का प्रकाशन और तकनीकी सत्र में 70 का प्रस्तुतीकरण हुआ। इस तरह यह राष्ट्रीय संगोष्ठी अपने उद्देश्य को सफलतापूर्वक प्राप्त करने में सफल रही।
 
कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव डॉ अरुण कुमार वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया और इसका संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के छात्र भार्गव कुमार ने किया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में बड़ी संख्या में शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति रही। राजनीति विज्ञान विभाग के शोधार्थियों और परास्नातक छात्रों ने इस संगोष्ठी को सफल बनाने में पूरी तन्मयता से अपना योगदान दिया।

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