प्रथम सेमेस्टर 2025 परीक्षा परिणाम सम्बन्धी सूचना     |      अति आवश्यक सूचना     |      कौशल विकास पाठ्यक्रम में प्रवेश की अंतिम तिथि के संदर्भ में     |      NOTICE Regarding SCHOLARSHIP     |      SCHOLARSHIP FORMS PENDING AT FORWARDING LEVEL     |      Notice regarding last chance of Biometric verification of Scholarship     |      Notice regarding Biometric verification of Scholarship     |      बीए/बीएससी प्रथम सेमेस्टर परीक्षा संबंधी महत्वपूर्ण सूचना     |      छात्रवृत्ति हेतु वेरीफिकेशन की अंतिम तिथि संबंधित सूचना     |      छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सूचना      |     

संगोष्ठी – प्रतिबंध साहित्य और प्रेमचंद

संगोष्ठी – प्रतिबंध साहित्य और प्रेमचंद

 

premchand-jayanti

 

सीएमपी डिग्री कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर 30-07-2025 को संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय ‘ प्रतिबंध साहित्य और प्रेमचन्द’ था ।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सत्यकाम थे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो संतोष भदौरिया कर रहे थे। इस कार्यक्रम में सी एम पी कॉलेज के प्राचार्य प्रो अजय प्रकाश खरे मौजूद थे। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत करते हुए हिंदी विभाग की संयोजिका प्रो सरोज सिंह ने इस विषय की उपादेयता को स्पष्ट किया। कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो दीनानाथ ने प्रेमचंद के लेखन को विचारधारा और साहित्य के सामाजिक सरोकार से जोड़ा ।उन्होंने प्रतिबंधित साहित्य का जिक्र करते हुए सामाजिक और नैतिक प्रतिबंधन की बात कही और प्रेमचंद, बेचन शर्मा उग्र के साहित्य के साथ  पेरियार ललई सिंह के साहित्य का भी हवाला दिया।

मुख्य अतिथि के रूप में आए प्रो सत्यकाम ने प्रतिबंधित साहित्य के होने मात्र से प्रेमचंद की रचनात्मकता में आए बदलाव को  उनकी कहानियों के उदाहरणों के साथ रेखांकित किया।उन्होंने कहा कि आज प्रेमचंद को और ज्यादा पढ़ने की जरूरत है ताकि प्रेमचंद के साहित्य के मूल मर्म उनके राष्ट्रवाद को जान समझ सके । अध्यक्षता कर रहे प्रो संतोष भदौरिया ने सोजे वतन की जब्ती पर ही सवाल उठाया और प्रदीप जैन की किताब सोजे वतन  जब्ती की सच्चाई  के हवाले से कई तथ्यपरक बातें कहीं । रियासत, प्रेस, प्रतिबंध प्रेमचंद का साहित्य और आजादी के सवाल पर प्रो भदौरिया ने बेहद तार्किक बातें कहीं जिसे श्रोताओं ने काफी पसंद किया।इसके अलावा देश भर में आर्काइवल कार्यों पर ध्यान देने की बात कहीं ।

इस कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के  डा. रामानुज यादव ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग की वरिष्ठ शिक्षिका प्रो.आभा त्रिपाठी ने किया । इस कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षिका प्रो अर्चना खरे, प्रो  नीता सिन्हा, प्रो संगीता, प्रो एस पी सिंह के अलावा हिंदी विभाग से डॉ प्रेमशंकर सिंह, डॉ रंजीत सिंह, डॉ भारती कोरी,डॉ प्रियंका गौड़ के अलावा काफी संख्या में शोधार्थी एवं अन्य विद्यार्थी मौजूद थे ।

कार्यक्रम विवरण

 

Connect with us on :

Send your comments/feedback

cmpdc1@gmail.com